श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन

परिचय

Introduction

श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन का ध्येय वाक्य क्षत्रिय समाज की नई पीढ़ी में समाज, राष्ट्र और सृष्टि के प्रति पूर्वजों की भांति दायित्व बोध की जागृति में संलग्न श्री क्षत्रिय युवक संघ के संस्थापक पूज्य तनसिंह जी का आह्वान "उठें क्षत्र-मातृका की अर्चना करें, जुटें लोकरंजना की प्रार्थना करें" है। इसी आह्वान को संभव बनाने की दिशा में युवाशक्ति को कर्मशील करने के लिए श्री क्षत्रिय युवक संघ के चतुर्थ संघप्रमुख पूज्य भगवान सिंह रोलसाहबसर ने 12 जनवरी 2019 को संघ के केन्द्रीय कार्यालय 'संघशक्ति, जयपुर' में श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन की स्थापना की। मनुष्य का स्वभाव समूह में रहने का है, इसीलिए वह जन्म, व्यवसाय, क्षेत्र, भाषा आदि के आधार पर समूहों का निर्माण करता है और उनके प्रति एक विशेष प्रकार के अपनत्व का भाव स्वयं में विकसित करता है। जाति हमें जन्म से मिलने वाला ऐसा ही समूह है जो हमारे जीवन को प्रत्येक मोड़ पर प्रभावित करता है। इसी प्रभाव के कारण हमारे में जाति के प्रति सम्मानजनक जातीय भाव पैदा होता है और उसकी सेवा का संकल्प पैदा होता है।

यह क्षत्रिय जाति हमारी मां है, हमारे लिए देवी भगवती का स्वरूप है और इसीलिए पूज्य तनसिंह ने क्षत्र मातृका की अर्चना का आह्वान किया है। लेकिन इस अर्चना में लोक रंजना (लोक के आनंद) की प्रार्थना का समावेश किया है अर्थात हम हमारी इस क्षत्र मातृका की इस प्रकार कृतज्ञता पूर्वक अर्चना करें कि उससे लोक में रंजना (आनंद) का विस्तार हो। इसी विचार को केन्द्र में रखकर श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन क्षत्रिय समाज की युवा पीढ़ी को संयोजित, संगठित और क्रियाशील बनाने में संलग्न है। श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन अभावों की शिकायत करने की अपेक्षा वर्तमान में उपलब्ध अवसरों के समुचित उपयोग की बात करता है। वह अतीत की श्रेष्ठताओं, आदर्शों, जीवन मूल्यों और वर्तमान की व्यवस्थागत वास्तविकताओं के बीच सेतु का काम करते हुए उन श्रेष्ठताओं, आदर्शों और जीवन मूल्यों को वर्तमान व्यवस्था के अनुरूप धरातल पर उतारने को प्रयासरत है। वह वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था की मर्यादाओं के भीतर क्षत्रिय जीवन मूल्यों के अनुरूप क्षत्रिय समाज की युवा शक्ति को समाज, राष्ट्र एवं सृष्टि की सेवा के लिए परस्पर संपर्क, समझ, सहयोग एवं सशक्तिकरण के मार्ग पर चलायमान करने के लिए समाज के सहयोग से कृतज्ञता पूर्वक निरंतर कर्मशील है।

हमारे प्रणेता

Our Pioneer
पूज्य श्री तनसिंह जी

पूज्य श्री तनसिंह जी

संस्थापक, श्री क्षत्रिय युवक संघ

जीवन परिचय

पूज्य श्री तनसिंह जी का जन्म राजस्थान के एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनके मन में समाज सेवा और राष्ट्र कल्याण की भावना प्रबल थी। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज के उत्थान और युवाओं में संस्कार निर्माण के लिए समर्पित कर दिया।

22 दिसंबर, 1946 को उन्होंने श्री क्षत्रिय युवक संघ की स्थापना की। उनका मानना था कि समाज का विकास तभी संभव है जब युवा पीढ़ी में संस्कार, अनुशासन और सेवा भाव का विकास हो। इसी उद्देश्य से उन्होंने 'सामूहिक संस्कारमयी मनोवैज्ञानिक कर्मप्रणाली' का विकास किया।

"जगो तो ए दीपक। उस महफिल में जलना, जिसका प्रकाश समय ने लूट लिया है। जिओ तो बन्धु। वह जीवन जीना, जिसकी इतिहास बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहा है।"
— पूज्य श्री तनसिंह जी

उनके नेतृत्व में संघ ने राजस्थान के कोने-कोने में अपनी शाखाएं स्थापित कीं और लाखों युवाओं के जीवन में परिवर्तन लाया। उनकी शिक्षाएं आज भी संघ के कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

हमारे प्रणेता

Our Inspiration
पूज्य श्री भगवान सिंह जी रोलसाहबसर

पूज्य श्री भगवान सिंह जी रोलसाहबसर

चतुर्थ संघ प्रमुख श्री क्षत्रिय युवक संघ
संस्थापक श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन

जीवन परिचय

संघ के चतुर्थ संघ प्रमुख माननीय भगवानसिंह रोलसाहबसर ने 12 जनवरी 2019 को संघ के केन्द्रीय कार्यालय 'संघशक्ति' में श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन की स्थापना की। उन्हीं की प्रेरणा और आशीर्वाद से श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन का उद्देश्य, कार्ययोजना एवं कार्यप्रणाली निर्धारित हुई और उनके मार्गदर्शन में ही श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन ने अब तक की यात्रा तय की है। विगत 5 जून 2025 को श्रद्धेय भगवान सिंह रोलसाहबसर का देहावसान हो जाने के कारण उनका पार्थिव सान्निध्य एवं मार्गदर्शन आज उपलब्ध नहीं है लेकिन जनवरी 2019 से जून 2025 तक उनके द्वारा तय किए गए मापदंड एवं प्रदान किया गया मार्गदर्शन ही श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन के भविष्य की आधार भूमि है और उसी के अनुरूप उनकी सूक्ष्म उपस्थिति से प्रेरणा लेकर फाउंडेशन अपनी यात्रा को जारी रखे हुए है।

श्रद्धेय भगवान सिंह जी का जन्म 2 फरवरी 1944 को सीकर जिले की फतेहपुर तहसील के रोलसाहबसर गांव में हुआ। आप पिता श्री मेघसिंहजी एवं माताजी श्रीमती गोम कंवर की पांचवीं संतान थे। आपके जन्म के कुछ दिनों पूर्व ही पिताजी का देहावसान हो गया। 1955 तक गांव से ही प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण कर 1960 में चमड़िया काॅलेज फतेहपुर से मैट्रिक व रुईया काॅलेज रामगढ शेखावाटी से प्री युनिवर्सिटी की। 1961 में लोहिया काॅलेज चुरु में प्रवेश लिया। यहीं आपका श्री क्षत्रिय युवक संघ से परिचय हुआ। आपका पहला शिविर 1961 में रतनगढ़ में आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण शिविर था। उसी समय पूज्य तनसिंह जी से संपर्क हुआ एवं उनके आदेश पर चुरु छोड़कर आगे के अध्ययन के लिए जयपुर पधारे। 1963 में रतनगढ़ में ही आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के बाद आप संघ के एक समर्पित स्वयंसेवक के रुप में कर्मशील हुए। जयपुर के राजपूत छात्रावास की शाखा का दायित्व संभाला और यहीं रहते हुए राजस्थान काॅलेज से स्नातक किया।

1964-65 में पूज्य तनसिंह जी के सान्निध्य में दिल्ली रहने लगे जब वे सांसद थे। 1967 में पूज्य तनसिंह जी ने सिवाना (बाड़मेर) में व्यवसाय प्रारंभ किया तो उनके प्रथम सहयोगी के रुप में साथ रहने लगे। सिवाना के ठाकुर तेजसिंह जी की सुपुत्री से इसी दौरान आपका विवाह हुआ। यहीं पूज्य तनसिंह जी एवं पूज्य नारायणसिंह जी का निकट सान्निध्य, सामीप्य एवं मार्गदर्शन मिलता रहा। दिसंबर 1979 में पूज्य तनसिंह जी के देहावसान के उपरांत पूज्य नारायणसिंह जी में तनसिंह जी के ही स्वरुप का दर्शन पाकर निरंतर सान्निध्य पाते रहे। पूज्य नारायण सिंह जी के जीवन में यौगिक अनुभव प्रकट होने लगे और ज्यों ज्यों वे भौतिक रुप से संघ कार्य से अलग रहने लगे त्यों त्यों आप पर दायित्व आता रहा। अनौपचारिक रुप से संघ की सभी गतिविधियों के संचालन का दायित्व आप पर आ गया। अक्टूबर 1989 में पूज्य नारायणसिंह जी के देहावसान के बाद संघप्रमुख का गहन दायित्व आप पर आया।

एक तरफ पूज्य तनसिंह जी व पूज्य नारायणसिंह जी के वरदहस्त का भौतिक अभाव था वहीं 28 वर्षों तक उनके सामीप्य एवं सान्निध्य का अनुभव था। संघप्रमुख बनते ही राजस्थान के पूर्वी छोर से गुजरात के पश्चिमी छोर स्थित समुद्र तट तक संघ के हर नये पुराने स्वयंसेवक से व्यक्तिगत संपर्क साधने के लिए यात्राएं की। प्रशिक्षण शिविरों एवं शाखाओं की संख्या में आशातीत वृद्धि होने लगी। संघ के स्वर्ण जयंती के दिन 22 दिसंबर 1996 को संघ के वृहद स्वरुप का संसार को दर्शन करवाया। अब तक पुरुष वर्ग तक सीमित संघ महिलाओं व बालिकाओं तक पहुंचा। बालिकाओं के भी प्रशिक्षण शिविर लगने लगे। इसके साथ ही संघ का परिवारों में प्रवेश हुआ, दंपति शिविर लगने लगे।

बड़े-बड़े समारोहों के रुप में पूज्य तनसिंह जी का पार्थिव स्वरुप श्री क्षत्रिय युवक संघ प्रकट होने लगा। जयपुर, जोधपुर, बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर, कुचामन एवं गुजरात के सुरेन्द्रनगर में संघ के स्थायी कार्यालय बने। बाड़मेर में संघ का एक आदर्श शिविर स्थल ‘आलोक आश्रम‘ के रुप में विकसित हुआ। सीकर में बालिका शिक्षा का नया प्रकल्प ‘श्री दुर्गा महिला विकास संस्थान‘ प्रारंभ हुआ। संघ का विस्तार क्षेत्र गुजरात व राजस्थान से बाहर निकलकर महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश के साथ साथ सुदूर दक्षिण के राज्यों तक विस्तारित हुआ।

स्वयं को सर्वात्मना संघ कार्य में अनवरत नियोजित रखने वाले श्रद्धेय भगवान सिंह जी का अंतिम शिविर उ.प्र.शि. उदयपुर था, शिविर के दौरान ही आप बीमार हुए और अंत में 5 जून 2025 को अपना पार्थिव शरीर त्याग दिया। अपने जीवन काल में आप संघ के कुल 340 शिविरों में शामिल हो चुके थे। संघ के विस्तार पाते स्वरुप के कारण समाज भी संघ से विभिन्न प्रकार की अपेक्षाएं करने लगा। उन अपेक्षाओं को समझा एवं तद्नुसार प्रयास प्रारंभ किए। राजनीति में समाज के लोगों के संरक्षक की भूमिका में उभरे वहीं समाज के राजनीतिज्ञों को संस्थागत रुप से समाज के आम नागरिकों से जोड़ने का प्रयास ‘श्री प्रताप फाउण्डेशन‘ के रुप में प्रारंभ किया। इसके अलावा भी समाज के विभिन्न वर्गों की अपेक्षाओं को समझकर उन्हें संघ की मूल धारा से जोड़ने के अनेक नवीन प्रयास निरंतर जारी रखे।

युवाओं की शक्ति को समाज सेवा में क्रियाशील करने हेतु 'श्री प्रताप युवा शक्ति' नाम से संगठन बनाया। राष्ट्र की विभिन्न अग्रणी सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से संपर्क साधकर उनमें अपने व्यक्तित्व के बल पर संघ की छाप छोड़ी। इसी बीच आपका संपर्क ‘यथार्थ गीता‘ के प्रणेता स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज से हुआ एवं उनके मार्गदर्शन में आध्यात्म का वास्तविक स्वरुप अपने साथियों को समझाकर उस मार्ग पर आरूढ किया। भारत की पूरी पश्चिमी सीमा से लेकर पूर्व में कलकत्ता तक एवं सुदूर दक्षिण तक अपने संपर्कों के माध्यम से पूज्य स्वामी जी के संदेश को पहुंचाया। इस प्रकार 1989 से ही लगातार श्री क्षत्रिय युवक संघ के आदर्श नेतृत्व के रुप में संपूर्ण समाज को दिशा देने के लिए अथक परिश्रम करने वाले माननीय भगवानसिंह जी अपने प्रत्येक सहयोगी के लिए अनासक्त एवं निर्विकार मार्गदर्शक बनकर रहे और उन्हें अंगुली पकङकर जीवन लक्ष्य की ओर खींचा।

4 जुलाई 2021 को आपने श्री क्षत्रिय युवक संघ के संरक्षक व मार्गदर्शक की भूमिका अंगीकार करते हुए माननीय श्री लक्ष्मण सिंह बैण्यांकाबास को संघप्रमुख का औपचारिक दायित्व सौंपा। आपके मार्गदर्शन में 22 दिसंबर 2021 को संसार ने संघ के हीरक जयंती के रूप में राजस्थान की राजधानी जयपुर में क्षत्रिय समाज के विराट एवं मर्यादित स्वरूप के दर्शन किए। 28 जनवरी 2024 में पूज्य तनसिंह के जन्म शताब्दी समारोह के रूप में देश की राजधानी दिल्ली में समाज का विशाल समागम संपन्न हुआ। आज श्री क्षत्रिय युवक संघ उनके उत्तराधिकारी के नेतृत्व में निरंतर गतिमान है।

उदेश्य एवं कार्ययोजना

Objective and Work Plan

उदेश्य

Objective

बाड़मेर-जैसलमेर के पूर्व सांसद एवं श्री क्षत्रिय युवक संघ के संस्थापक पूज्य तनसिंह जी की विचारधारा एवं जीवन दर्शन के अनुरूप समाज के सकारात्मक सामाजिक भाव वाले युवाओं को संयोजित कर समाज में सकारात्मक क्रियाशीलता बढ़ाने के लिए काम करना।

कार्ययोजना

Work Plan

अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए संस्थान निम्न बिंदुओं पर कार्य करेगा

  • समाज के युवाओं को पूज्य तनसिंह जी की विचारधारा एवं दर्शन से परिचित करवाने में सहयोगी बनने के लिए समाज की युवा शक्ति से संपर्क बढ़ाकर उन्हें समाज व राष्ट्र के प्रति दायित्व बोध बढ़ाने वाले विभिन्न कार्यक्रमों से जोड़ना व उनके लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित करना।
  • समाज के लोगों को भारत के संवैधानिक मूल्यों व हमारे महान पूर्वजों के जीवन मूल्यों की साम्यता से परिचित करवा कर आदर भाव से उनका पालन करने को प्रेरित करना।
  • समाज के युवाओं को संवैधानिक साधनों व सरकारी योजनाओं की जानकारी व प्रशिक्षण देकर क्षात्र भाव के अनुरूप जरुरतमंद की सहायता व अन्याय का प्रतिकार करने के लिए उनका उपयोग करने को प्रेरित करना तथा समय समय पर समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवैधानिक तरीकों से सरकारों के समक्ष समाज का पक्ष रखना।
  • राजनैतिक, प्रशासनिक, व्यवसायिक एवं अन्य सभी क्षेत्रों में कार्यरत युवाओं के बीच संपर्क, सामंजस्य एवं सहयोग बढ़ाकर उन्हें समाज के लिए अधिकतम उपयोगी बनाना।
  • समाज के लोगो के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा, रोजगार, मातृशक्ति की भागीदारी, रूढ़ि उन्मूलन, परंपराओं के पालन, इतिहास व संस्कृति के संरक्षण, वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था में भागीदारी आदि विभिन्न विषय जो संस्था के उद्देश्य की प्राप्ति में सहायक हों, उन पर समग्र रूप से काम करने के लिए उपयुक्त वातावरण तैयार करना।
  • विभिन्न समाजों के बीच सम्मान पूर्वक सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाने के विभिन्न अवसरों का सदुपयोग करना एवं क्षत्रिय समाज की सभी के प्रति सम्मान व गरिमापूर्ण व्यवहार करने की परंपरागत विशेषता को पुष्ट करने हेतु विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करना।

मूल प्रक्रिया

Core Process

संपर्क

Contact

समझ

Understanding

सहयोग

Cooperation

सशक्तिकरण

Empowerment

सेवा

Service

मूल संगठन

Parent Organization
श्री क्षत्रिय युवक संघ स्थापना 1946

श्री क्षत्रिय युवक संघ

Shri Kshatriya Yuvak Sangh (SKYS)

श्री क्षत्रिय युवक संघ एक सामाजिक संगठन है जो समाज में संस्कार निर्माण के उद्देश्य से कार्य करता है। पूज्य श्री तनसिंह जी श्री क्षत्रिय युवक संघ के संस्थापक हैं जिन्होंने इसकी स्थापना 22 दिसंबर,1946 को की थी। संघ अपनी 'सामूहिक संस्कारमयी मनोवैज्ञानिक कर्मप्रणाली' के माध्यम से समाज में क्षात्रवृत्ति की पुनर्स्थापना का कार्य कर रहा है। 'परित्राणाय साधूनां, विनाशाय च दुष्कृताम' के मूल मंत्र पर चलते हुए श्री क्षत्रिय युवक संघ क्षत्रिय जाति को त्याग व बलिदान रूपी स्वधर्म के मार्ग पर पुनः आरूढ़ करने के लिए प्रयत्नशील है।

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सहयोगी संगठन

Sister Organization
श्री पुरुषार्थ फाउंडेशन सहयोगी संगठन

श्री प्रताप फाउंडेशन

Shri Pratap Foundation (SPF)

वर्तमान व्यवस्था में हमारे पूर्वजों के जीवन मूल्यों के अनुरूप काम करने के लिए राजपूत समाज के राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय व सहयोग स्थापित करने हेतु उपयुक्त वातावरण तैयार कर वर्तमान व्यवस्था में समाज की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने एवं सामाजिक हितों के संरक्षण के लिए श्री क्षत्रिय युवक संघ के आनुषंगिक संगठन के रूप में कार्य करना।

करणीय कार्य

  • क) वर्तमान व्यवस्था में राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए...
    • सभी वयस्क सदस्यों के नाम मतदाता सूचियों में लिखवाने को प्रेरित करना।
    • शत प्रतिशत मतदान करने हेतु प्रेरित करना।
    • चुनावों में समाज के योग्यतम उम्मीदवार अथवा समाज के सहयोगी अन्य समाज के योग्यतम उम्मीदवार के पक्ष में उपयुक्त वातावरण बनाने व उसके पक्ष में अधिकतम मतदान करने के लिए समाज के मतदाताओं को जागरूक करना।
    • सकारात्मक मतदान के लिए (हराने के लिए नहीं जिताने के लिए) मतदाताओं को शिक्षित करना।
    • अन्य समाजों एवं साझा हितों वाले समूहों के बीच संवाद स्थापित कर परस्पर सहयोग का वातावरण बनाना।
  • ख) राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय व सहयोग हेतु ...
    • राजपूत समाज के राजनेताओं को संरक्षण प्रदान करने के लिए उपयुक्त मंच पर समाज का पक्ष रखना।
    • समाज के राजनेताओं को समाज के लिए अधिकतम उपयोगी बनाने के लिए कार्य करना।
    • समाज में राजनेताओं के प्रति सकारात्मक सहयोग का वातावरण तैयार करना।
    • समाज के मतदाताओं व राजनेताओं में सामाजिक विषयों पर सामाजिक नेतृत्व का अनुगामी बनने का भाव जागृत करना।
  • ग) सामाजिक हितों के संरक्षण के लिए...
    • राजनीतिक दलों व राजनेताओं के समक्ष राजपूत मतदाता की भावना को व्यक्त करने के लिए काम करना।
    • संपूर्ण राजपूत समाज से जुड़े विषयों पर व्यवस्था के समक्ष समाज का पक्ष रखना।
    • राजनीतिक दलों से समाज के लोगों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने हेतु संवाद स्थापित करना।
    • श्री क्षत्रिय युवक संघ के नेतृत्व द्वारा निर्देशित अन्य सभी कार्य करना जो उनके द्वारा सामाजिक हितों के संरक्षणार्थ श्री प्रताप फाउंडेशन के उद्धेश्य की प्राप्ति में सहायक माने जायेंगे।

उपरोक्त सभी के लिए कार्यशालाओं, बैठकों, चिंतन शिविरों, संपर्क यात्राओं आदि के माध्यम से अधिकतम समाज बंधुओं से संपर्क किया जाएगा। सरकारों व राजनीतिक दलों तक पत्र, ज्ञापन, व्यक्तिगत बैठकों, प्रतिनिधिमंडलों आदि गरिमामय व लोकतांत्रिक तरीकों के माध्यम से समाज के विषय रखे जाएंगे। आवश्यक होने पर समाचार माध्यमों के द्वारा अपनी बात रखी जाएगी व सोशल मीडिया आदि प्रचलित माध्यमों का सहारा लिया जाएगा

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